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Wednesday, 9 May 2018

यूपी लोक सेवा आयोग भारतीयों की जाँच कर रही सीबीआई ने शुरू किया  इंटरव्यू लेते समय नंबर दिए जाने की गोपनीयता भंग करने वाले अधिकारियो  पर शिकंजा कसना , सीबीआइ ने करीब दो दर्जन बोर्ड सदस्यों पर संदेह जताते हुए किया उन्हें चिह्न्ति , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 

यूपी लोक सेवा आयोग भारतीयों की जाँच कर रही सीबीआई ने शुरू किया  इंटरव्यू लेते समय नंबर दिए जाने की गोपनीयता भंग करने वाले अधिकारियो  पर शिकंजा कसना , सीबीआइ ने करीब दो दर्जन बोर्ड सदस्यों पर संदेह जताते हुए किया उन्हें चिह्न्ति , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 




भर्तियों की जांच में उप्र लोकसेवा आयोग के अफसर, पीसीएस परीक्षा में चयनित और इन दोनों के बीच सेतु का काम करने वाले बाहरी तत्व ही नहीं, उन बोर्ड के सदस्यों पर भी सीबीआइ का शिकंजा कसने वाला है जिन्होंने साक्षात्कार लेते समय नंबर दिए जाने की गोपनीयता भंग की।सीबीआइ ने करीब दो दर्जन बोर्ड सदस्यों पर संदेह जताते हुए उन्हें चिह्न्ति कर रखा है। भर्तियों में भ्रष्टाचार की जद में आने वाले हर किसी के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।

आयोग में पूर्व अध्यक्ष डा. अनिल यादव के कार्यकाल में कर्मचारी से लेकर परीक्षक और साक्षात्कार लेने वाले बोर्ड तक उन्हीं के इशारे पर काम करते थे। डा. अनिल यादव का प्रभाव कुछ ऐसा था कि उनके आदेश को नकारने वाले को उसका खामियाजा भुगतना पड़ता था। इसके अलावा भर्तियों में भ्रष्टाचार की लहर के साथ सभी बहने लगे थे। जिस पर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने आंदोलन के दरम्यान विरोध भी जताया था। साक्षात्कार लेने वाले बोर्ड के गठन से लेकर उनकी ओर से अभ्यर्थी को अंक दिए जाने तक की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रहती है लेकिन, पूर्व अध्यक्ष डा. अनिल यादव के कार्यकाल में सभी गोपनीयता उन्हीं के चेंबर में भंग हो जाती थी।

अब तक की जांच पड़ताल में सीबीआइ को भी इसके प्रमाण मिले हैं कि बोर्ड सदस्यों का भी अभ्यर्थियों के अवैध चयन में कहीं न कहीं हाथ था। इसी कारण सीबीआइ अफसरों ने आयोग में कई स्तर पर पूछताछ करके बोर्ड सदस्यों के बारे में जानकारी एकत्र की और उन पर भी शिकंजा कसने की रणनीति तैयार कर ली है। सीबीआइ के सूत्र बताते हैं कि करीब दो दर्जन लोगों पर संदेह जताया गया है जिनसे जल्दी ही पूछताछ हो सकती है। प्रमाण पुख्ता हो जाने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है। सीबीआइ अफसरों का कहना है कि आयोग में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार का पता चला है।

Tuesday, 8 May 2018

यूपी लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में 2015 के पीसीएस अफसरों की हो सकती है गिरफ़्तारी , , सीबीआई के निशाने पर है कुछ चयनित अफसर , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में 2015 के पीसीएस अफसरों की हो सकती है गिरफ़्तारी , , सीबीआई के निशाने पर है कुछ चयनित अफसर , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में 2015 के पीसीएस अफसरों की हो सकती है गिरफ़्तारी , , सीबीआई के निशाने पर है कुछ चयनित अफसर , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर

यूपी लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले में 2015 के पीसीएस अफसरों की हो सकती है गिरफ़्तारी , , सीबीआई के निशाने पर है कुछ चयनित अफसर , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर  




उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की परीक्षाओं में हुए घोटाले में सीबीआई की ओर से आयोग के अज्ञात अफसरों और कुछ बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। सीबीआई अब इन लोगों को चिह्नित कर रही है। जांच एजेंसी जल्द इनको गिरफ्तार  कर सकती है। इनमें न केवल अफसर और बाहरी लोग, बल्कि पीसीएस-2015 के वे चयनित अफसर भी हो सकते हैं, जिन्हें संदिग्ध मानते हुए सीबीआई ने उनसे पूछताछ की है।

सीबीआई की ओर से मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद आयोग में हड़कंप की स्थिति है। कयासबाजी तेज हो गई है कि सीबीआई ने जिन अज्ञात अफसरों और अज्ञात बाहरी लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है, उनमें कौन लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि पीसीएस परीक्षा-2015 में गड़बड़ी के सीबीआई को पुख्ता सुबूत मिल चुके हैं। इसके लिए जिम्मेदार आयोग के कुछ वर्तमान एवं पूर्व अफसरों को भी चिह्नित किया जा चुका है। सीबीआई उनके खिलाफ भी ठोस सुबूत जुटा रही है, ताकि इस बार सीधी कार्रवाई की जा सके। ऐसे अफसरों के बैंक रिकार्ड से लेकर पूरी संपत्ति खंगाली जा रही है। साथ ही पूर्व सरकार में कद्दावर नेताओं से उनके कनेक्शन भी खंगाले जा रहे हैं। इसके साथ सीबीआई की टीम इस दिशा में भी जांच कर रही है कि चयनित अभ्यर्थियों और आयोग के इन अज्ञात अफसरों एवं बाहरी अज्ञात लोगों के बीच संपर्क कैसे हुआ और इसका सूत्रधार कौन था। जांच में सीबीआई को कुछ अफसरों और पीसीएस-2015 के कुछ संदिग्ध चयनित अफसरों के खिलाफ पुख्ता सुबूत मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई का अगला कदम इनकी गिरफ्तारी हो सकता है।

सीबीआई की टीम ने लोअर सबऑर्डिनेट परीक्षा-2013 के संदिग्ध चयनितों को भी नोटिस जारी कर रखा है। इन संदिग्ध चयनित अफसरों से भी सीबीआई की टीम पूछताछ करेगी। सूत्रों का कहना है कि पीसीएस-2015 और लोअर-2013 के तार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पीसीएस-2015 से जुड़े आयोग के जिन अज्ञात अफसरों को सीबीआई चिह्नित कर रही है, उनमें से कई अफसर लोअर-2013 की परीक्षा प्रक्रिया से भी जुड़े थे और सीबीआई को भी पीसीएस-2015 के बाद सबसे अधिक शिकायतें लोअर-2015 को लेकर मिली हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में सीबीआई को कुछ सुराग मिले हैं और उन्हीं के आधार पर सीबीआई अब लोअर-2013 के संदिग्ध चयनितों से पूछताछ करने जा रही है।

लोक सेवा आयोग की रजिस्ट्रार भर्ती भी घिरी विवादों में  , प्रतियोगी छात्रों ने आयोग पर लगाया आरोप बिना पद रिक्त हुए ही नौ लोगों का चयन कर लिया गया  , छात्रों ने की  सीबीआई कैंप कार्यालय में शिकायत , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 

लोक सेवा आयोग की रजिस्ट्रार भर्ती भी घिरी विवादों में  , प्रतियोगी छात्रों ने आयोग पर लगाया आरोप बिना पद रिक्त हुए ही नौ लोगों का चयन कर लिया गया  , छात्रों ने की  सीबीआई कैंप कार्यालय में शिकायत , क्लिक करे और पढ़े पूरी खबर 



लोक सेवा आयोग की रजिस्ट्रार भर्ती भी विवादों में घिर गई है। आरोप है कि बिना पद रिक्त हुए ही नौ लोगों का चयन कर लिया गया है। प्रतियोगी छात्र सुजीत कुमार ने इस मामले की शिकायत पहले लोक सेवा आयोग के सचिव से की थी। सोमवार को उन्होंने इस बारे में सीबीआई कैंप कार्यालय में शिकायती पत्र दे दिया।शिकायत के मुताबिक, केंद्रीयत सेवा नियमावली-1975 के तहत प्रदेश में रजिस्ट्रार के कुल 15 पद होते हैं। इनमें से 67 प्रतिशत यानी दस पद आयोग से भरे जाते हैं जबकि शेष पांच पदों पर पदोन्नति की जाती है।

सुजीत का कहना है कि आयोग पूर्व में दो बार में रजिस्ट्रार के कुल सात पदों के लिए चयन कर चुका है। इस प्रकार 10 के सापेक्ष सिर्फ तीन पद ही रिक्त थे। लेकिन आयोग ने कुल 12 पदों के लिए चयन करते हुए 27 अप्रैल 2018 को परिणाम घोषित किया है। सुजीत की मांग है कि 12 पदों पर हुए चयन को निरस्त करते हुए शासन से रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक के रिक्त पदों पर स्पष्ट अधियाचन मांगकर नए सिरे से चयन प्रक्रिया की जाए।

 ऐसी आशंका जताई जा रही है कि रजिस्ट्रार के जिन 12 पदों के लिए चयन किया गया है, उसमें परीक्षा नियंत्रक का पद भी शामिल हो गया है। जबकि परीक्षा नियंत्रक का चयन अलग से किया जाना चाहिए। सीबीआई ने सुजीत का शिकायती पत्र ले लिया है।उधर, सिविल लाइंस बांदा के रहने वाले शिवनारायण त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि रजिस्ट्रार के चयन में उन्हें अनुभव प्रमाण पत्र न होने का बहाना बनाकर जानबूझ कर बाहर कर दिया गया जबकि आयोग में प्रमाण पत्र न होने की स्थिति में औपबंधिक तौर पर इंटरव्यू में शामिल किए जाने की व्यवस्था है।

 सुजीत की शिकायत के संबंध में आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि शिकायती पत्र मिला है। इसमें जो बिंदु उठाए गए हैं, उसकी जांच कराई जा रही है। आयोग का काम सिर्फ परीक्षा कराना है। बकौल सचिव, रिक्त पदों की सूचना शासन स्तर से दी जाती है।

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